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Swami Vivekananda Biography – स्वामी विवेकानंद जी का संपूर्ण जीवन

  • Biography of Swami Vivekananda in Hindi |”उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो जाए “ स्वामी विवेकानंद जी का यह क्रांतिकारी वाक्य आज भी हम सभी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। संपूर्ण विश्व के अंदर हिंदू धर्म को बताने में स्वामी विवेकानंद जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। 
  • 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित धर्म सभा के अंदर स्वामी विवेकानंद जी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा था “Sisters And Brother of America “ उनकी इस लाइन इन ना सिर्फ भारत के देशवासियों का बल्कि पूरे विश्व के देशवासियों का दिल जीत लिया था। 
  • स्वामी विवेकानंद जी को सन्यासी के नाम से जाना जाता था क्योंकि महज 25 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने सन्यासी के मार्ग को चुन लिया था और मात्र 39 वर्ष की उम्र में ही स्वामी विवेकानंद जी पंचतत्व में विलीन हो गए थे लेकिन वे आज भी हम सभी के दिल में जिंदा है और आज इस लेख में हम उनकी यादों को फिर से जिंदा करने जा रहे हैं क्योंकि आज इस लेख में हम आपको “ Biography of Swami Vivekananda in Hindi “ शेयर करने वाले हैं और इस लेख के अंदर हम उनकी क्रांतिकारी विचारों के बारे में भी आपके साथ में बात करेंगे तो इस लेख को अंत तक ध्यान पूर्वक जरूर पढ़ें – 

Swami Vivekananda Biography in Hindi | स्वामी विवेकानंद जी की संपूर्ण जीवनी

नाम(Name)- स्वामी विवेकानंद 

माता का नाम (Mother’s Name) – भुवनेश्वरी देवी

पिता का नाम(Father’s Name)- विश्वनाथ दत्त 

जन्मस्थान (Birth Date) 12 जनवरी 1863(कलकत्ता)

पेशा (Profession) – आध्यात्मिक गुरु(Spiritual master)

मृत्यु स्थल  (Death) 4 जुलाई 1902(बेलूर मठ, बंगाल)

प्रसिद्दी कारण –  इंग्लैंड और यूरोप और USA में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार

स्वामी विवेकानंद जी का शुरुआती जीवन(Early life of Swami Vivekananda) –

  • स्वामी विवेकानंद जी का जन्म कोलकाता के गौरमोहन मुखर्जी के अंदर 12 जनवरी 18 सो 63 में हुआ था और उनको बचपन के अंदर नरेंद्र दास दत्त के नाम से जाना जाता था और उनका परिवार कोलकाता के अंदर एक कुलीन परिवार के साथ में संबंध रखता था। उनके पिताजी विश्वनाथ दत्त एक वकील थे जो कि कोलकाता के अंदर ही उच्च न्यायालय में पदस्थ थे। उनकी माता जी का नाम भुवनेश्वरी देवी था जो कि धर्म को बहुत अधिक मानती थी, जिसकी वजह से ही स्वामी विवेकानंद जी को एक प्रेरणा मिली थी हिंदू धर्म को ज्यादा से ज्यादा समझने की। 
  • स्वामी विवेकानंद जी बचपन से ही आध्यात्मिकता के अंदर रुचि रखते थे वह हमेशा भगवान की तस्वीरों के सामने ध्यान लगाकर साधना करते थे और साधु-संतों और सन्यासियों की बातों का उनके जीवन पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता था। 

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा (Education of Swami Vivekananda) – 

  • स्वामी विवेकानंद जी की स्कूल की शिक्षा 1871 के अंदर विद्यासागर की मेट्रोपॉलिटन संस्थान से शुरू हुई थी और शुरुआत से ही स्वामी जी की रुचि धर्म इतिहास कला और साहित्य, वेद,उपनिषद, भगवत गीता,रामायण,महाभारत और पुराणों की अंदर थी। इन्होंने इन सभी पुराणों का गहनता के साथ में अध्ययन किया था और इसके अलावा स्वामी जी शारीरिक गतिविधियों में हमेशा आगे रहते थे। उसके बाद 1884 के अंदर इन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके वकालत की पढ़ाई शुरू कर दी थी लेकिन उसी समय इनके पिताजी का देहांत हो गया था,जिसके बाद संपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। 
  • स्वामी विवेकानंद जी की पढ़ाई के अंदर रुचि बचपन से ही थी,उन्होंने पश्चिमी दर्शन शास्त्रों का अध्ययन किया और साथ ही साथ संस्कृत ग्रंथों के का अध्ययन किया। जिसकी वजह से इनकी स्मरणशक्ती के अंदर काफी विकास हुआ और ही और स्वामी जी किसी भी चीज को जब पढ़ते थे तो उसको तुरंत याद कर पाते थे। 

रामकृष्ण मठ की स्थापना(Establishment of Ramakrishna Math)- 

  • स्वामी विवेकानंद जी बचपन से ही एक जिज्ञासु विद्यार्थी थे,उनका दिमाग हमेशा कुछ ना कुछ खोजने में लगा रहता था तो एक दिन उन्होंने महर्षि देवेंद्र नाथ से एक सवाल पूछा कि क्या आपने कभी भगवान को देखा है? और उनके इस सवाल पर महर्षि देवेंद्र नाथ सोच में पड़ गए थे,जिसके बाद उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी को रामकृष्ण परमहंस के पास जाने की सलाह दी थी और उसके बाद स्वामी विवेकानंद जी रामकृष्ण परमहंस के पास गए और उनकी बातों से इतना ज्यादा प्रभावित हो गए कि उन्होंने उनको अपना गुरु मान लिया लेकिन 1885 के अंदर रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु हो गई थी,जिसके बाद स्वामी विवेकानंद जी ने रामकृष्ण संघ की स्थापना कर दी थी लेकिन उसके बाद इसका नाम बदलकर रामकृष्ण मठ किया गया था। 

स्वामी विवेकानंद जी की भारत यात्रा  

  • स्वामी विवेकानंद जी मात्र 25 साल की उम्र में ही पूरे भारत की पैदल यात्रा करने में निकल पड़े थे और अपनी पैदल यात्रा में उन्होंने आगरा वृंदावन वाराणसी अयोध्या अलवर जैसे कई स्थानों पर गए। 
  • जब उन्होंने पूरे भारत की यात्रा की उसके बाद उनको पता लगा कि किस तरह से इस देश के अंदर जातिगत भेदभाव हो रहा है,किस तरह से लोग धर्म के नाम पर एक दूसरे से भेदभाव कर रहे हैं और उसके बाद उन्होंने इस जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए कई प्रयास किए। 
  • स्वामी विवेकानंद जी ने भारत की यात्रा करने के बाद अमेरिका जाने का फैसला लिया और पूरी दुनिया के अंदर भारत के प्रति लोगों की सोच में बदलाव करने का एक बड़ा फैसला लिया था। 

(1893- विश्व धर्म सम्मेलन) शिकागो भाषण– 

  • 1893 के अंदर स्वामी विवेकानंद जी शिकागो पहुंचे और वहां पर पहुंच कर उन्होंने विश्व धर्म सम्मेलन के अंदर भागीदारी ली और उसके बाद उन्होंने विश्व के धर्मगुरुओं के सामने अपनी धर्म किताबें रखी, जिसके अंदर श्रीमद भगवत गीता को लोगों के सामने पेश किया गया लेकिन अमेरिका के अंदर लोगों ने उनका खूब मजाक उड़ाया लेकिन जब उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत की तो पूरी सभा ने उनका तालियों के साथ में सम्मान किया। 
  • स्वामी विवेकानंद जी ने शांति से जीने का संदेश दिया,धर्म का संदेश दिया,कर्तव्य के बारे में बताया,जिसके बाद लोगों के दिलों में उनकी एक अलग ही पहचान बन गई और धीरे-धीरे स्वामी विवेकानंद जी लोकप्रिय होते ही चले गए 

विवेकानंद जी की प्रेरक विचार(Inspirational thoughts of Vivekananda)- 

उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।

लगातार अच्छे विचार सोचते रहना ही बुरे विचारों को दबाने का एकमात्र तरीका यही है।

जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।

उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो,धन्य हो, सनातन हो,तुम तत्व नहीं हो,ना ही शरीर हो,तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो।

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है।

जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है।

किसी की निंदा ना करें,अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं तो ज़रुर बढाएं अगर नहीं बढ़ा सकते,तो अपने हाथ जोड़िये,अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये,और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।

जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो सोचो,तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।

कुछ सच्चे,इमानदार और उर्जावान पुरुष और महिलाएं,जितना कोई भीड़ एक सदी में कर सकती है उससे अधिक एक वर्ष में कर सकते हैं।

यह भगवान से प्रेम का बंधन वास्तव में ऐसा है जो आत्मा को बांधता नहीं है बल्कि प्रभावी ढंग से उसके सारे बंधन तोड़ देता है।

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निष्कर्ष (Conclusion)- Swami Vivekananda Biography in Hindi

आज के इस लेख के अंदर हमने आपके साथ “Biography of Swami Vivekananda in Hindi” शेयर की है,जिसके अंदर हमने स्वामी विवेकानंद जी के बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार से दी है। साथ ही साथ हमने स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरक विचार भी आपके साथ शेयर किए हैं। स्वामी विवेकानंद जी हमेशा से ही युवाओं को प्रेरित करने की बातें करते थे और स्वामी विवेकानंद जी शुरुआत से ही समाज सुधारक के रूप में काम करते थे और युवाओं को हमेशा प्रेरित करते थे। 

आशा करते हैं आपको इस लेख Swami Vivekananda Biography in Hindi“ की जानकारी जरूर पसंद आई होगी। यदि आपको यह लेख अच्छा लगा तो इसको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करना ना भूले, धन्यवाद। 

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